श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 10: व्यासजीका जाना, मैत्रेयजीका धृतराष्ट्र और दुर्योधनसे पाण्डवोंके प्रति सद्भावका अनुरोध तथा दुर्योधनके अशिष्ट व्यवहारसे रुष्ट होकर उसे शाप देना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.10.38 
मैत्रेय उवाच
नाहं वक्ष्यामि ते भूयो न ते शुश्रूषते सुत:।
एष ते विदुर: सर्वमाख्यास्यति गते मयि॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
मैत्रेयजी बोले, "हे राजन! आपका पुत्र मेरी बात सुनना नहीं चाहता, इसलिए मैं इस समय आपसे और कुछ नहीं कहूँगा। मेरे जाने के बाद ये विदुरजी आपको पूरी बात बताएँगे।"
 
Maitreya said, "O King! Your son does not want to listen to me, so I will not say anything more to you at this time. This Vidurji will tell you the whole story after I leave." 38
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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