श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 10: व्यासजीका जाना, मैत्रेयजीका धृतराष्ट्र और दुर्योधनसे पाण्डवोंके प्रति सद्भावका अनुरोध तथा दुर्योधनके अशिष्ट व्यवहारसे रुष्ट होकर उसे शाप देना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.10.37 
वैशम्पायन उवाच
विलक्षयंस्तु राजेन्द्रो दुर्योधनपिता तदा।
मैत्रेयं प्राह किर्मीर: कथं भीमेन पातित:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! तब दुर्योधन के पिता महाराज धृतराष्ट्र ने भीमसेन की शक्ति का विस्तृत विवरण प्राप्त करने के लिये मैत्रेय से पूछा- 'ऋषिवर! भीम ने किरमिर को कैसे मारा?'॥ 37॥
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! Then Duryodhan's father Maharaja Dhritarashtra, in order to get a detailed description of Bhimasena's strength, asked Maitreya - 'Sage! How did Bhima kill Kirmir?'॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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