Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.10.30-31: उस मूर्ख ने मैत्रेय को कोई उत्तर नहीं दिया। वह मुँह नीचा किए चुपचाप खड़ा रहा। हे राजन! मैत्रेय ने देखा कि दुर्योधन सुनना नहीं चाहता और पैरों से ज़मीन कुरेद रहा है। यह देखकर उसके मन में क्रोध उत्पन्न हुआ। तब महामुनि मैत्रेय क्रोध से भर गए। | mahabharat अध्याय 3.10: व्यासजीका जाना, मैत्रेयजीका धृतराष्ट्र और दुर्योधनसे पाण्डवोंके प्रति सद्भावका अनुरोध तथा दुर्योधनके अशिष्ट व्यवहारसे रुष्ट होकर उसे शाप देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न किंचिदुक्त्वा दुर्मेधास्तस्थौ किंचिदवाङ्मुख:।
तमशुश्रूषमाणं तु विलिखन्तं वसुंधराम्॥ ३०॥
दृष्ट्वा दुर्योधनं राजन् मैत्रेयं कोप आविशत्।
स कोपवशमापन्नो मैत्रेयो मुनिसत्तम:॥ ३१॥
अनुवाद
उस मूर्ख ने मैत्रेय को कोई उत्तर नहीं दिया। वह मुँह नीचा किए चुपचाप खड़ा रहा। हे राजन! मैत्रेय ने देखा कि दुर्योधन सुनना नहीं चाहता और पैरों से ज़मीन कुरेद रहा है। यह देखकर उसके मन में क्रोध उत्पन्न हुआ। तब महामुनि मैत्रेय क्रोध से भर गए।
That foolish man did not reply to Maitreya. He stood quietly with his face lowered. O King! Maitreya saw that Duryodhan did not want to listen and was raking the ground with his feet. Seeing this, anger arose in his mind. Then that great sage Maitreya was overcome by anger.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥