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mahabharat 3.10.27: वृद्धावस्था और मृत्यु के प्रभाव से ग्रस्त कौन है जो युद्ध में पाण्डवों का सामना कर सके? हे भरतवंशी! ऐसे पराक्रमी पाण्डवों के साथ आपको शांतिपूर्वक रहना चाहिए॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 3.10: व्यासजीका जाना, मैत्रेयजीका धृतराष्ट्र और दुर्योधनसे पाण्डवोंके प्रति सद्भावका अनुरोध तथा दुर्योधनके अशिष्ट व्यवहारसे रुष्ट होकर उसे शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 10: व्यासजीका जाना, मैत्रेयजीका धृतराष्ट्र और दुर्योधनसे पाण्डवोंके प्रति सद्भावका अनुरोध तथा दुर्योधनके अशिष्ट व्यवहारसे रुष्ट होकर उसे शाप देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.10.27 
कस्तान् युधि समासीत जरामरणवान्नर:।
तस्य ते शम एवास्तु पाण्डवैर्भरतर्षभ॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वृद्धावस्था और मृत्यु के प्रभाव से ग्रस्त कौन है जो युद्ध में पाण्डवों का सामना कर सके? हे भरतवंशी! ऐसे पराक्रमी पाण्डवों के साथ आपको शांतिपूर्वक रहना चाहिए॥ 27॥
 
Who is subject to the effects of old age and death, can face the Pandavas in battle? O jewel of the Bharata clan! You must live peacefully with such mighty Pandavas.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)