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mahabharat 3.10.13: महाराज! मैंने वहाँ सुना है कि आपके पुत्रों ने अपनी मति खो दी है, वे जुआ खेलने लगे हैं और इस कारण उन पर महान भय छा गया है ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.10: व्यासजीका जाना, मैत्रेयजीका धृतराष्ट्र और दुर्योधनसे पाण्डवोंके प्रति सद्भावका अनुरोध तथा दुर्योधनके अशिष्ट व्यवहारसे रुष्ट होकर उसे शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 10: व्यासजीका जाना, मैत्रेयजीका धृतराष्ट्र और दुर्योधनसे पाण्डवोंके प्रति सद्भावका अनुरोध तथा दुर्योधनके अशिष्ट व्यवहारसे रुष्ट होकर उसे शाप देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.10.13 
तत्राश्रौषं महाराज पुत्राणां तव विभ्रमम्।
अनयं द्यूतरूपेण महाभयमुपस्थितम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! मैंने वहाँ सुना है कि आपके पुत्रों ने अपनी मति खो दी है, वे जुआ खेलने लगे हैं और इस कारण उन पर महान भय छा गया है ॥13॥
 
Maharaj! I heard there that your sons have lost their senses. They have started gambling and thus a great fear has descended upon them. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)