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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 10: व्यासजीका जाना, मैत्रेयजीका धृतराष्ट्र और दुर्योधनसे पाण्डवोंके प्रति सद्भावका अनुरोध तथा दुर्योधनके अशिष्ट व्यवहारसे रुष्ट होकर उसे शाप देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.10.11 
मैत्रेय उवाच
तीर्थयात्रामनुक्रामन् प्राप्तोऽस्मि कुरुजाङ्गलान्।
यदृच्छया धर्मराजं दृष्टवान् काम्यके वने॥ ११॥
 
 
अनुवाद
मैत्रेय बोले, "हे राजन! तीर्थयात्रा करते हुए मैं अचानक कुरुजांगल क्षेत्र में आ गया हूँ। काम्यकवन में मेरी मुलाकात धर्मराज युधिष्ठिर से भी हुई थी।
 
Maitreya said, "O King! While travelling on a pilgrimage I have suddenly come to the Kurujangala region. I also met Dharmaraja Yudhishthira in the Kamyakavana.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)