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वैशम्पायन उवाच
एवं द्यूतजिता: पार्था: कोपिताश्च दुरात्मभि:।
धार्तराष्ट्रै: सहामात्यैर्निर्ययुर्गजसाह्वयात्॥ ९॥
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, 'हे राजन! कुन्तीपुत्र धृतराष्ट्र के दुष्ट पुत्रों तथा मन्त्रियों द्वारा द्यूतक्रीड़ा में पराजित होकर कुपित होकर हस्तिनापुर से चले गये।
Vaishmpayana said, 'O King! After being defeated in a game of dice by the evil-minded sons of Dhritarashtra along with his ministers, the son of Kunti, who was enraged, left Hastinapur.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥