श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.1.9 
वैशम्पायन उवाच
एवं द्यूतजिता: पार्था: कोपिताश्च दुरात्मभि:।
धार्तराष्ट्रै: सहामात्यैर्निर्ययुर्गजसाह्वयात्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, 'हे राजन! कुन्तीपुत्र धृतराष्ट्र के दुष्ट पुत्रों तथा मन्त्रियों द्वारा द्यूतक्रीड़ा में पराजित होकर कुपित होकर हस्तिनापुर से चले गये।
 
Vaishmpayana said, 'O King! After being defeated in a game of dice by the evil-minded sons of Dhritarashtra along with his ministers, the son of Kunti, who was enraged, left Hastinapur.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)