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mahabharat 3.1.8: हे ब्रह्मन्! मैं आपके मुख से महान पराक्रम और तेज से संपन्न पाण्डवों की कथा सुनना चाहता हूँ। मुझे इस विषय में अत्यंत जिज्ञासा है।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.1.8 
श्रोतुमिच्छामि चरितं भूरिद्रविणतेजसाम्।
कथ्यमानं त्वया विप्र परं कौतूहलं हि मे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! मैं आपके मुख से महान पराक्रम और तेज से संपन्न पाण्डवों की कथा सुनना चाहता हूँ। मुझे इस विषय में अत्यंत जिज्ञासा है।॥8॥
 
O Brahman! I wish to hear the story of the Pandavas, who are endowed with great valour and glory, being told by you. I am extremely curious about this. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)