श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  3.1.6-7 
कथं च राजपुत्री सा प्रवरा सर्वयोषिताम्।
पतिव्रता महाभागा सततं सत्यवादिनी॥ ६॥
वनवासमदु:खार्हा दारुणं प्रत्यपद्यत।
एतदाचक्ष्व मे सर्वं विस्तरेण तपोधन॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे तपस्वी! संसार की समस्त सुन्दरियों में श्रेष्ठ, पतिव्रता और सदा सत्य बोलने वाली, जो कभी दुःख सहन करने में समर्थ नहीं थी, वह सौभाग्यवती राजकुमारी द्रौपदी वनवास का भयंकर दुःख कैसे सहन कर सकी? कृपया मुझे यह सब विस्तारपूर्वक बताइए॥6-7॥
 
O ascetic! How could that fortunate princess Draupadi, the best of all beauties in the world, faithful to her husband and always speaking the truth, who was never capable of suffering, endure the terrible pain of exile? Please tell me all this in detail. ॥ 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)