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mahabharat 3.1.5: महामुने! ब्राह्मण श्रेष्ठ हैं! शत्रुओं का संहार करने वाले उन वीर योद्धाओं ने वन में बारह वर्ष कैसे बिताए? 5॥   |   mahabharat अध्याय 3.1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.1.5 
कथं च द्वादश समा वने तेषां महामुने।
व्यतीयुर्ब्राह्मणश्रेष्ठ शूराणामरिघातिनाम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महामुने! ब्राह्मण श्रेष्ठ हैं! शत्रुओं का संहार करने वाले उन वीर योद्धाओं ने वन में बारह वर्ष कैसे बिताए? 5॥
 
Mahamune! Brahmin is the best! How did those brave warriors who killed the enemies spend their twelve years in the forest? 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)