वे श्रेष्ठ ब्राह्मण हंसों के समान मधुर वाणी बोलते हुए कुरुवंश के रत्न राजा युधिष्ठिर का रात्रि भर सत्कार करते रहे और उन्हें शान्ति देते रहे ॥ 46॥
Those excellent Brahmins, speaking in voices as sweet as that of swans, entertained King Yudhishthira, the jewel of the Kuru clan, all night, reassuring him. ॥ 46॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि अरण्यपर्वणि पौरप्रत्यागमने प्रथमोऽध्याय:॥ १॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत अरण्यपर्वमें पुरवासियोंके लौटनेसे सम्बन्ध रखनेवाला पहला अध्याय पूरा हुआ॥ १॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)