Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.1.45: अग्नि जलाकर वेद और मन्त्रों का पाठ करके तथा अग्निहोत्र का जप करके उस समय, जो सायंकाल की स्वाभाविक शोभा के कारण रमणीय और दानव-दानव संसर्ग के समय के कारण अत्यन्त भयंकर प्रतीत हो रहा था, वे ब्राह्मण आपस में बातें करने लगे॥45॥ | mahabharat अध्याय 3.1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अग्नि जलाकर वेद और मन्त्रों का पाठ करके तथा अग्निहोत्र का जप करके उस समय, जो सायंकाल की स्वाभाविक शोभा के कारण रमणीय और दानव-दानव संसर्ग के समय के कारण अत्यन्त भयंकर प्रतीत हो रहा था, वे ब्राह्मण आपस में बातें करने लगे॥45॥
After lighting the fire and reciting the Vedas and Mantras and chanting Agnihotra at that time, which seemed delightful due to the natural beauty of the evening and extremely dangerous due to the time of demon-demon transmission, the Brahmins started talking to each other. 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥