Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.1.44: उनमें से कुछ अग्निहोत्री थे और कुछ निराग्नि। वे अपने शिष्यों और संबंधियों को भी साथ ले गए थे। वेदों का अध्ययन करने वाले उन ब्राह्मणों से घिरे हुए राजा युधिष्ठिर अत्यंत शोभायमान लग रहे थे। | mahabharat अध्याय 3.1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
साग्नयोऽनग्नयश्चैव सशिष्यगणबान्धवा:।
स तै: परिवृतो राजा शुशुभे ब्रह्मवादिभि:॥ ४४॥
अनुवाद
उनमें से कुछ अग्निहोत्री थे और कुछ निराग्नि। वे अपने शिष्यों और संबंधियों को भी साथ ले गए थे। वेदों का अध्ययन करने वाले उन ब्राह्मणों से घिरे हुए राजा युधिष्ठिर अत्यंत शोभायमान लग रहे थे।
Some of them were Sagni (Agnihotris) and some were Niragni. They had also taken their disciples and relatives along with them. King Yudhishthira looked very handsome surrounded by those Brahmins who were studying the Vedas. 44.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥