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mahabharat 3.1.43: उस रात पाँचों पाण्डव पुत्र शोक से व्याकुल होकर केवल जल ही पीते रहे। कुछ ब्राह्मण भी स्नेहवश पाण्डवों के साथ वहाँ गए थे।   |   mahabharat अध्याय 3.1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.1.43 
उदकेनैव तां रात्रिमूषुस्ते दु:खकर्षिता:।
अनुजग्मुश्च तत्रैतान् स्नेहात् केचिद् द्विजातय:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उस रात पाँचों पाण्डव पुत्र शोक से व्याकुल होकर केवल जल ही पीते रहे। कुछ ब्राह्मण भी स्नेहवश पाण्डवों के साथ वहाँ गए थे।
 
The five Pandava sons, afflicted with grief, drank only water that night. Some Brahmins too had accompanied the Pandavas there out of affection.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)