श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.1.41 
निवृत्तेषु तु पौरेषु रथानास्थाय पाण्डवा:।
आजग्मुर्जाह्नवीतीरे प्रमाणाख्यं महावटम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
वासियों के लौटकर पाण्डव रथों पर बैठकर गंगा के तट पर प्रमाणकोटि नामक एक महान वृक्ष के पास आये ॥41॥
 
After the return of the natives, the Pandavas, sitting on chariots, came near a great tree named Pramankoti on the banks of Ganga. 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)