vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास
»
श्लोक 41
श्लोक
3.1.41
निवृत्तेषु तु पौरेषु रथानास्थाय पाण्डवा:।
आजग्मुर्जाह्नवीतीरे प्रमाणाख्यं महावटम्॥ ४१॥
अनुवाद
वासियों के लौटकर पाण्डव रथों पर बैठकर गंगा के तट पर प्रमाणकोटि नामक एक महान वृक्ष के पास आये ॥41॥
After the return of the natives, the Pandavas, sitting on chariots, came near a great tree named Pramankoti on the banks of Ganga. 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×