Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.1.39: वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! जब धर्मराज ने इस प्रकार विनम्र भाव से उनसे प्रार्थना की, तब सारी प्रजा भयंकर पीड़ा से चिल्ला उठी और कहने लगी - 'हे महाराज!' | mahabharat अध्याय 3.1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! जब धर्मराज ने इस प्रकार विनम्र भाव से उनसे प्रार्थना की, तब सारी प्रजा भयंकर पीड़ा से चिल्ला उठी और कहने लगी - 'हे महाराज!'
Vaishmpayana says: Janamejaya! When Dharmaraja requested them in this humble manner, all the subjects cried out horribly in pain saying, 'Oh! Maharaj!'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥