श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.1.36 
ते त्वस्मद्धितकामार्थं पालनीया: प्रयत्नत:।
युष्माभि: सहिता: सर्वे शोकसंतापविह्वला:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वे सभी लोग तुम्हारे साथ दुःख और संताप से व्याकुल हैं; अतः तुम सब लोग पूरी सावधानी से उनकी देखभाल करो और हमारे कल्याण की चिंता करो ॥ 36॥
 
All of them are distressed with grief and anguish along with you; therefore, you all should look after them with all care and care for our welfare. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)