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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास
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श्लोक 35
श्लोक
3.1.35
भीष्म: पितामहो राजा विदुरो जननी च मे।
सुहृज्जनश्च प्रायो मे नगरे नागसाह्वये॥ ३५॥
अनुवाद
(आपको पता होना चाहिए कि) हमारे पितामह भीष्म, राजा धृतराष्ट्र, विदुरजी, मेरी माता और हमारे अधिकांश रिश्तेदार भी हस्तिनापुर में ही हैं।
(You should know that) our grandfather Bhishma, King Dhritarashtra, Vidurji, my mother and most of our relatives are also in Hastinapur.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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