श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.1.34 
तदहं भ्रातृसहित: सर्वान् विज्ञापयामि व:।
नान्यथा तद्धि कर्तव्यमस्मत्स्नेहानुकम्पया॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
मैं और मेरे भाई आप सब से कुछ प्रार्थना करते हैं। कृपया हम पर प्रेम और दया कीजिए तथा उनके पीछे चलने से अपना मुख न मोड़िए। ॥34॥
 
I, along with my brothers, have a request for something from all of you. Please show us love and kindness and do not turn your face away from following Him. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)