श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.1.30 
बुद्धिश्च हीयते पुंसां नीचै: सह समागमात्।
मध्यमैर्मध्यतां याति श्रेष्ठतां याति चोत्तमै:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
नीच लोगों की संगति करने से मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो जाती है। निम्न लोगों की संगति करने से वह निम्नतर हो जाती है और श्रेष्ठ लोगों की संगति करने से वह अधिकाधिक उत्तम हो जाती है॥30॥
 
‘By associating with lowly people, man's intelligence gets destroyed. By associating with mediocre people, it becomes mediocre and by associating with excellent people, it becomes increasingly good.॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)