श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.1.29 
असतां दर्शनात् स्पर्शात् संजल्पाच्च सहासनात्।
धर्माचारा: प्रहीयन्ते सिद्धॺन्ति च न मानवा:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
दुष्ट लोगों को देखने, छूने, उनसे बात करने या उनके साथ रहने से धर्म का नाश होता है, इसलिए ऐसे लोग कभी सफलता प्राप्त नहीं करते ॥29॥
 
'Seeing, touching, talking to or interacting with evil people leads to loss of religious conduct. That is why such people never attain success. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)