श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.1.26 
तस्मात् प्राज्ञैश्च वृद्धैश्च सुस्वभावैस्तपस्विभि:।
सद्भिश्च सह संसर्ग: कार्य: शमपरायणै:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
अतः मनुष्य को विद्वानों, वृद्ध पुरुषों और अच्छे स्वभाव वाले, शांतिप्रिय तपस्वियों की संगति करनी चाहिए ॥26॥
 
‘Therefore one should associate with scholars, elderly men and good natured, peace-loving ascetic people. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)