श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.1.20 
क्व गमिष्यथ भद्रं वस्त्यक्त्वास्मान् दु:खभागिन:।
वयमप्यनुयास्यामो यत्र यूयं गमिष्यथ॥ २०॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों! आप सबका कल्याण हो। हम आपके वियोग में अत्यन्त दुःखी हैं। आप हमें छोड़कर कहाँ जा रहे हैं? आप जहाँ भी जाएँगे, हम भी आपके साथ चलेंगे॥ 20॥
 
‘Pandavas! May you all be blessed. We are very sad at your separation. Where are you going leaving us? We will go with you wherever you go.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)