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mahabharat 3.1.19: वैशम्पायनजी कहते हैं: ऐसा कहकर नगर के नागरिक पाण्डवों के पास गए और कुन्तीपुत्रों तथा माद्रीपुत्रों से मिलकर वे सब हाथ जोड़कर उनसे इस प्रकार बोले:॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.1.19 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वानुजग्मुस्ते पाण्डवांस्तान् समेत्य च।
ऊचु: प्राञ्जलय: सर्वे कौन्तेयान् माद्रिनन्दनान्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: ऐसा कहकर नगर के नागरिक पाण्डवों के पास गए और कुन्तीपुत्रों तथा माद्रीपुत्रों से मिलकर वे सब हाथ जोड़कर उनसे इस प्रकार बोले:॥19॥
 
Vaishmpayana says: Having said this, the citizens of the city went to the Pandavas and meeting the sons of Kunti and Madri, all of them folded their hands and spoke to them thus:॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)