श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.1.18 
सानुक्रोशा महात्मानो विजितेन्द्रियशत्रव:।
ह्रीमन्त: कीर्तिमन्तश्च धर्माचारपरायणा:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
पाण्डव दयालु, महात्मा, जितेन्द्रिय, शत्रुओं को जीतने वाले, लज्जाशील, यशस्वी, धार्मिक और गुणवान हैं ॥18॥
 
Pandavas are kind, Mahatma, Jitendriya, conqueror of enemies, shy, successful, religious and virtuous. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)