श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.1.17 
नेयमस्ति मही कृत्स्ना यत्र दुर्योधनो नृप:।
साधु गच्छामहे सर्वे यत्र गच्छन्ति पाण्डवा:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जहाँ दुर्योधन राजा है, वहाँ यह सम्पूर्ण पृथ्वी शून्य है; अतः यही अच्छा होगा कि हम सब लोग वहीं जाएँ जहाँ पाण्डव जा रहे हैं॥17॥
 
Where Duryodhana is the king, this entire earth is as nothing; therefore, it will be better that we all go where the Pandavas are going.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)