न तत् कुलं न चाचारो न धर्मोऽर्थ: कुत: सुखम्।
यत्र पापसहायोऽयं पापो राज्यं चिकीर्षति॥ १५॥
अनुवाद
जहाँ यह पापी पापियों की सहायता से राज्य करना चाहता है, वहाँ हमारा कुल, आचरण, धर्म और धन टिक नहीं सकते; फिर वहाँ सुख कैसे हो सकता है? ॥15॥
Where this sinner wants to rule with the help of sinners, our family, conduct, religion and wealth cannot survive; then how can there be any happiness? ॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)