पौरा ऊचु:
नेदमस्ति कुलं सर्वं न वयं न च नो गृहा:॥ १३॥
यत्र दुर्योधन: पाप: सौबलेनाभिपालित:।
कर्णदु:शासनाभ्यां च राज्यमेतच्चिकीर्षति॥ १४॥
अनुवाद
नगर के नागरिकों ने कहा - हे प्रभु! हमारा सम्पूर्ण कुल, हम और हमारे घर अब सुरक्षित नहीं हैं, क्योंकि सुबलपुत्र शकुनि द्वारा पाला गया पापी दुर्योधन, कर्ण और दु:शासन की सलाह से इस राज्य पर शासन करना चाहता है।
The citizens of the city said - Oh! Our entire clan, we and our homes are not safe now, because the sinful Duryodhana, brought up by Subala's son Shakuni, wants to rule this kingdom with the advice of Karna and Dushasan.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)