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mahabharat 3.1.11: इन्द्रसेन और चौदह से अधिक सेवकों ने सब स्त्रियों को तीव्रगामी रथों पर बिठाया और उनके पीछे चल पड़े ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 3.1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 1: पाण्डवोंका वनगमन, पुरवासियोंद्वारा उनका अनुगमन और युधिष्ठिरके अनुरोध करनेपर उनमेंसे बहुतोंका लौटना तथा पाण्डवोंका प्रमाणकोटितीर्थमें रात्रिवास  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.1.11 
इन्द्रसेनादयश्चैव भृत्या: परि चतुर्दश।
रथैरनुययु: शीघ्रै: स्त्रिय आदाय सर्वश:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रसेन और चौदह से अधिक सेवकों ने सब स्त्रियों को तीव्रगामी रथों पर बिठाया और उनके पीछे चल पड़े ॥11॥
 
Indrasen and more than fourteen servants placed all the women on fast-moving chariots and followed them. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)