Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.9.8-11: वासुकी नाग, तक्षक, ऐरावतनाग, कृष्ण, लोहित, पद्म और पराक्रमी चित्र, कंबल, अश्वतर, धृतराष्ट्र, बलाहक, मणिनाग, नाग, मणि, शंखनाख, कौरव्य, स्वस्तिक, एलापत्र, वामन, अपराजित, दोष, नंदक, पुराण, अभिक, शिभिक, श्वेत, भद्र, भद्रेश्वर, मणिमान, कुंडधार, कर्कोटक, आदि नाग धनंजय, पणिमन, बलशाली कुंडधार, प्रह्राद, मूशिकद, जन्मेजय आदि ध्वज, मंडल और फणों से सुशोभित वहां उपस्थित हैं, महानाग भगवान अनंत भी वहां मौजूद हैं, जिन्हें देखकर जल के स्वामी वरुण देव उन्हें आसन देते हैं और आदरपूर्वक उनकी पूजा करते हैं। वासुकी आदि सभी नाग उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं और भगवान शेष की अनुमति पाकर वे उचित आसन पर बैठ जाते हैं और उस स्थान की शोभा बढ़ाते हैं। युधिष्ठिर! ये तथा अन्य अनेक सर्प क्लेशों से मुक्त होकर उस सभा में महान वरुण की पूजा करते हैं। ॥8-11॥ | mahabharat अध्याय 2.9: वरुणकी सभाका वर्णन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वासुकी नाग, तक्षक, ऐरावतनाग, कृष्ण, लोहित, पद्म और पराक्रमी चित्र, कंबल, अश्वतर, धृतराष्ट्र, बलाहक, मणिनाग, नाग, मणि, शंखनाख, कौरव्य, स्वस्तिक, एलापत्र, वामन, अपराजित, दोष, नंदक, पुराण, अभिक, शिभिक, श्वेत, भद्र, भद्रेश्वर, मणिमान, कुंडधार, कर्कोटक, आदि नाग धनंजय, पणिमन, बलशाली कुंडधार, प्रह्राद, मूशिकद, जन्मेजय आदि ध्वज, मंडल और फणों से सुशोभित वहां उपस्थित हैं, महानाग भगवान अनंत भी वहां मौजूद हैं, जिन्हें देखकर जल के स्वामी वरुण देव उन्हें आसन देते हैं और आदरपूर्वक उनकी पूजा करते हैं। वासुकी आदि सभी नाग उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं और भगवान शेष की अनुमति पाकर वे उचित आसन पर बैठ जाते हैं और उस स्थान की शोभा बढ़ाते हैं। युधिष्ठिर! ये तथा अन्य अनेक सर्प क्लेशों से मुक्त होकर उस सभा में महान वरुण की पूजा करते हैं। ॥8-11॥
Vasuki Naag, Takshak, Airavatnaag, Krishna, Lohit, Padma and the mighty Chitra, Kambal, Ashwatar, Dhritarashtra, Balahak, Maninag, Naag, Mani, Shankhanakh, Kauravya, Swastika, Elapatra, Vaman, Aparajit, Dosh, Nandak, Puran, Abhik, Shibhik, Shwet, Bhadra, Bhadreshwar, Maniman, Kundhar, Karkotak, The serpents like Dhananjay, Paniman, the strong Kundhadhar, Prahrad, Mooshikad, Janmejay etc. are present there adorned with flags, mandalas and hoods, Mahanaag Lord Anant is also present there, on seeing whom Lord Varun, Lord of the Waters, gives them seats and worships them respectfully. All the serpents like Vasuki etc. stand in front of him with folded hands and after receiving the permission of Lord Shesha, they sit on appropriate seats and enhance the beauty of the place. Yudhisthira! These and many other serpents, free from troubles, worship the great Varuna in that assembly. ॥ 8-11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥