श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 9: वरुणकी सभाका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.9.4 
तथा शकुनयस्तस्यां विचित्रा मधुरस्वरा:।
अनिर्देश्या वपुष्मन्त: शतशोऽथ सहस्रश:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सभाभवन में सैकड़ों-हजारों पक्षी विचित्र और मधुर स्वर में कलरव करते रहते हैं। उनकी असाधारण शोभा का वर्णन नहीं किया जा सकता। उनका आकार अत्यंत सुंदर है॥4॥
 
Hundreds and thousands of birds chirping in strange and sweet voices keep on chirping inside the assembly hall. Their extraordinary beauty cannot be described. Their shape is very beautiful.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)