श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 9: वरुणकी सभाका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.9.30 
एषा मया सम्पतता वारुणी भरतर्षभ।
दृष्टपूर्वा सभा रम्या कुबेरस्य सभां शृणु॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! मैंने सभी दिशाओं में भ्रमण करते हुए वरुणजी का यह सुन्दर दरबार भी देखा है। अब कुबेर के दरबार का वर्णन सुनो।
 
O best of the Bharatas! While roaming around in all directions, I have also seen this beautiful court of Varunaji. Now listen to the description of Kubera's court.
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि लोकपालसभाख्यानपर्वणि वरुणसभावर्णने नवमोऽध्याय:॥ ९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत लोकपालसभाख्यानपर्वमें वरुणसभा-वर्णनविषयक नवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ श्लोक मिलाकर कुल ३४ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)