vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 9: वरुणकी सभाका वर्णन
»
श्लोक 27-28h
श्लोक
2.9.27-28h
महीधरा रत्नवन्तो रसा ये च प्रतिष्ठिता:॥ २७॥
कथयन्त: सुमधुरा: कथास्तत्र समासते।
अनुवाद
वहाँ रत्नजटित पर्वत और विशिष्ट रस (मूर्ति रूप में) निवास करते हुए अत्यन्त मधुर कथाएँ कहते हैं ॥27 1/2॥
The jeweled mountains and the distinguished Rasas (in the form of idols) reside there, telling very sweet stories. 27 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×