Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.89.31-32: 'कुन्ती के पुत्र क्रोध से भरे हुए हैं। वे द्रौपदी को यहाँ जो कष्ट दिया गया है, उसे कभी सहन नहीं करेंगे। वृष्णिवंश के महान धनुर्धर या सत्यवादी भगवान कृष्ण द्वारा रक्षित पांचाल के महाबली योद्धा भी इसे सहन नहीं करेंगे। अर्जुन अवश्य ही पांचाल के योद्धाओं से घिरा हुआ आएगा॥ 31-32॥ | mahabharat अध्याय 2.89: धृतराष्ट्रकी चिन्ता और उनका संजयके साथ वार्तालाप । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्या: पार्था: परिक्लेशं न क्षंस्यन्ते ह्यमर्षणा:।
वृष्णयो वा महेष्वासा: पाञ्चाला वा महारथा:॥ ३१॥
तेन सत्याभिसंधेन वासुदेवेन रक्षिता:।
आगमिष्यति बीभत्सु: पाञ्चालै: परिवारित:॥ ३२॥
अनुवाद
'कुन्ती के पुत्र क्रोध से भरे हुए हैं। वे द्रौपदी को यहाँ जो कष्ट दिया गया है, उसे कभी सहन नहीं करेंगे। वृष्णिवंश के महान धनुर्धर या सत्यवादी भगवान कृष्ण द्वारा रक्षित पांचाल के महाबली योद्धा भी इसे सहन नहीं करेंगे। अर्जुन अवश्य ही पांचाल के योद्धाओं से घिरा हुआ आएगा॥ 31-32॥
‘Kunti's sons are filled with resentment. They will never tolerate the suffering that Draupadi has been given here. Even the great archers of Vrishnivanshi or the mighty warriors of Panchala, protected by the truthful Lord Krishna, will not tolerate this. Arjuna will surely come surrounded by the warriors of Panchala.॥ 31-32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥