श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 89: धृतराष्ट्रकी चिन्ता और उनका संजयके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.89.3 
संजय उवाच
अवाप्य वसुसम्पूर्णां वसुधां वसुधाधिप।
प्रव्राज्य पाण्डवान् राज्याद् राजन् किमनुशोचसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा - हे पृथ्वीपति! धन-धान्य और रत्नों से परिपूर्ण वसुधा का राज्य पाकर और पाण्डवों को अपने देश से निकाल देने के बाद अब आप क्यों शोक कर रहे हैं?॥3॥
 
Sanjaya said - Lord of the earth! After getting the kingdom of Vasudha full of wealth and gems and after expelling the Pandavas from your country, why are you grieving now?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)