श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 89: धृतराष्ट्रकी चिन्ता और उनका संजयके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  2.89.26-27 
प्रातिष्ठत ततो भीष्मो द्रोणेन सह संजय।
कृपश्च सोमदत्तश्च बाह्लीकश्च महामना:॥ २६॥
ततोऽहमब्रुवं तत्र विदुरेण प्रचोदित:।
वरं ददानि कृष्णायै काङ्क्षितं यद् यदिच्छति॥ २७॥
 
 
अनुवाद
संजय! यह सब देखकर द्रोण, भीष्म, कृपाचार्य, सोमदत्त और महामना बाह्लीक वहाँ से उठकर चले गए। तब विदुर की प्रेरणा से मैंने यह कहा - 'मैं कृष्ण को इच्छित वर दूँगा। वह जो चाहे माँग सकती है।'॥ 26-27॥
 
Sanjay! Seeing all this, Drona, Bhishma, Kripacharya, Somdatta and Mahamana Bahlik got up from there and left. Then, on the inspiration of Vidura, I said this - 'I will give Krishna the desired boon. She can ask for whatever she wants.'॥ 26-27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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