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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  2.88.d4 
तदहृष्टमिवाकूजं गतोत्सवमिवाभवत्।
नगरं हास्तिनपुरं सस्त्रीवृद्धकुमारकम्॥
 
 
अनुवाद
संपूर्ण हस्तिनापुर नगर, जिसमें महिलाएं, बच्चे और वृद्धजन भी शामिल थे, हर्षविहीन, अवाक और उत्सवविहीन हो गया।
 
The entire city of Hastinapur, including women, children and elderly people, became joyless, speechless and without celebration.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)