Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.88.d3: पाण्डवों के विदा होते समय नगर के सभी नागरिक शोक से भरकर कह रहे थे, 'हाय! हाय! हमारे स्वामी, हमारे रक्षक वन जा रहे हैं। भाइयो! देखो, धृतराष्ट्र के पुत्रों की ओर से यह कैसा अन्याय हो रहा है?' | mahabharat अध्याय 2.88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हा हा गच्छन्ति नो नाथा: समवेक्षध्वमीदृशम्।
इति पौरा: सुदु:खार्ता: शोचन्ति स्म समन्तत:॥
अनुवाद
पाण्डवों के विदा होते समय नगर के सभी नागरिक शोक से भरकर कह रहे थे, 'हाय! हाय! हमारे स्वामी, हमारे रक्षक वन जा रहे हैं। भाइयो! देखो, धृतराष्ट्र के पुत्रों की ओर से यह कैसा अन्याय हो रहा है?'
When the Pandavas were leaving, all the citizens of the city were filled with grief and were saying, 'Alas! Alas! Our master, our protector is going to the forest. Brothers! See, what kind of injustice is this on the part of the sons of Dhritarashtra?'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥