श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  2.88.d2 
विदुर उवाच
ब्राह्मणा: क्षत्रिया वैश्या: शूद्रा येऽन्ये वदन्त्यथ।
तच्छृणुष्व महाराज वक्ष्यते च मया तव॥
 
 
अनुवाद
विदुर बोले - महाराज! इस घटना के विषय में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र आदि जो कुछ कहते हैं, उसे सुनिए। मैं आपको सब कुछ बता रहा हूँ।
 
Vidur said - Maharaj! Listen to what the Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas, Shudras and other people say about this incident. I am telling you everything.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)