श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  2.88.d11 
विदुर उवाच
एवं पौराश्च विप्राश्च सदारा: सहपुत्रका:।
स्मरन्त: पाण्डवान् सर्वे बभूवुर्भृशदु:खिता:॥
 
 
अनुवाद
विदुर जी कहते हैं - राजन! इस प्रकार नगर के ब्राह्मण अपनी पत्नियों और पुत्रों सहित पाण्डवों का स्मरण करते हुए अत्यन्त दुःखी हो गये।
 
Vidur ji says - King! In this way the Brahmins of the city, along with their wives and sons, became very sad while remembering the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)