श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  2.88.d1 
(धृतराष्ट्र उवाच
किमब्रुवन् नागरिका: किं वै जानपदा जना:।
मह्यं तत्त्वेन चाचक्ष्व क्षत्त: सर्वमशेषत:॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा- विदुर! जब पाण्डव वन को जाने लगे, उस समय नगर और देश के लोग क्या-क्या कह रहे थे, ये सब बातें मुझे पूरी विस्तारपूर्वक बताओ।
 
Dhritarashtra asked- Vidur! When the Pandavas started going to the forest, what were the people of the city and the country saying at that time, tell me all these things in full detail.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)