श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.88.9 
धृतराष्ट्र उवाच
विविधानीह रूपाणि कृत्वा गच्छन्ति पाण्डवा:।
तन्ममाचक्ष्व विदुर कस्मादेवं व्रजन्ति ते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - विदुर! मुझे बताओ कि पांडव यहाँ भ्रमण करते हुए जो नाना प्रकार के कार्य कर रहे हैं, उनका रहस्य क्या है? वे इस प्रकार क्यों जा रहे हैं?
 
Dhritarashtra asked - Vidur! Tell me what is the secret behind the different activities that the Pandavas are doing while travelling here. Why are they going like this?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)