श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.88.7 
कृष्णा तु केशै: प्रच्छाद्य मुखमायतलोचना।
दर्शनीया प्ररुदती राजानमनुगच्छति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
परम सुन्दरी विशाललोचना कृष्णा अपने केशों से मुख ढककर रोती हुई राजा के पीछे-पीछे आ रही हैं॥7॥
 
The most beautiful Vishallochana Krishna is following the king crying, covering her face with her hair. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)