श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.88.6 
पांसूपलिप्तसर्वाङ्गो नकुलश्चित्तविह्वल:।
दर्शनीयतमो लोके राजानमनुगच्छति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
संसार में सबसे अधिक आकर्षक और मनोहर नकुल, शरीर पर धूल लगाए हुए, अशांत मन से राजा युधिष्ठिर के पीछे-पीछे चल रहे हैं ॥6॥
 
Nakula, who is most attractive and charming in the world, is following King Yudhishthira in a restless mind, with dust all over his body. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)