श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.88.51 
द्रोणस्य वचनं श्रुत्वा धृतराष्ट्रोऽब्रवीदिदम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य के ये वचन सुनकर धृतराष्ट्र बोले-॥ 51॥
 
Hearing these words of Dronacharya, Dhritarashtra said -॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)