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श्री महाभारत
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पर्व 2: सभा पर्व
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अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन
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श्लोक 5
श्लोक
2.88.5
सिकता वपन् सव्यसाची राजानमनुगच्छति।
माद्रीपुत्र: सहदेवो मुखमालिप्य गच्छति॥ ५॥
अनुवाद
सव्यसाची अर्जुन राजा युधिष्ठिर के पीछे रेत बिखेरते हुए जा रहे हैं। माद्रीपुत्र सहदेव उनके मुख पर कीचड़ मलते हुए जा रहे हैं।
Savyasachi Arjuna is following King Yudhishthira scattering sand. Madri's son Sahadeva goes smearing mud on his face.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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