श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.88.49 
सोऽयं नूनमनुप्राप्तस्त्वत्कृते काल उत्तम:।
त्वरितं कुरुत श्रेयो नैतदेतावता कृतम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
यह तुम्हारे लिए निश्चय ही बहुत अच्छा अवसर है । तुम तुरन्त अपने कल्याण के लिए कार्य करना आरम्भ कर दो । केवल पाण्डवों को वनवास भेज देने से तुम्हारा उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता ॥ 49॥
 
‘This is certainly a very good opportunity for you. Immediately start working towards your welfare. Your aim cannot be achieved merely by sending the Pandavas to exile.॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)