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mahabharat 2.88.48: 'धृष्टद्युम्न, द्रोण की मृत्यु का समाचार सर्वत्र फैल गया है। उनका जन्म मुझे मारने के लिए ही हुआ था। यह बात भी सभी ने सुनी है। धृष्टद्युम्न स्वयं अपनी वीरता के लिए संसार में विख्यात हैं।' 48   |   mahabharat अध्याय 2.88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.88.48 
धृष्टद्युम्नो द्रोणमृत्युरिति विप्रथितं वच:।
मद्वधाय श्रुतोऽप्येष लोके चाप्यतिविश्रुत:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
'धृष्टद्युम्न, द्रोण की मृत्यु का समाचार सर्वत्र फैल गया है। उनका जन्म मुझे मारने के लिए ही हुआ था। यह बात भी सभी ने सुनी है। धृष्टद्युम्न स्वयं अपनी वीरता के लिए संसार में विख्यात हैं।' 48
 
'Dhrishadhyumna, Drona's death is a news that has spread everywhere. He was born only to kill me. Everyone has heard this too. Dhrishtadyumna himself is famous in the world for his bravery. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)