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mahabharat 2.88.40: ‘पाण्डव लोग जुए में पराजित होकर धर्मानुसार वन में चले गए हैं। वे वहाँ बारह वर्ष तक रहेंगे।॥40॥   |   mahabharat अध्याय 2.88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.88.40 
धर्मत: पाण्डुपुत्रा वै वनं गच्छन्ति निर्जिता:।
ते च द्वादश वर्षाणि वने वत्स्यन्ति पाण्डवा:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
‘पाण्डव लोग जुए में पराजित होकर धर्मानुसार वन में चले गए हैं। वे वहाँ बारह वर्ष तक रहेंगे।॥40॥
 
‘The Pandavas have gone to the forest in accordance with Dharma after being defeated in gambling. They will stay there for twelve years.॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)