श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 88: वनगमनके समय पाण्डवोंकी चेष्टा और प्रजाजनोंकी शोकातुरताके विषयमें धृतराष्ट्र तथा विदुरका संवाद और शरणागत कौरवोंको द्रोणाचार्यका आश्वासन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.88.4 
विदुर उवाच
वस्त्रेण संवृत्य मुखं कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:।
बाहू विशालौ सम्पश्यन् भीमो गच्छति पाण्डव:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
विदुर बोले - कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर अपना मुख वस्त्र से ढँककर जा रहे हैं। पाण्डुपुत्र भीमसेन अपनी विशाल भुजाओं को देखते हुए जा रहे हैं।
 
Vidura said - Kunti's son Yudhishthira is going covering his face with a cloth. Pandu's son Bhimasena is going while looking at his huge arms.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)